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कांग्रेस एक रक्त बीज

 कांग्रेस एक रक्त बीज  नेहरुवीय कांग्रेस ने आज़ादी के फ़ौरन बाद जो विषबीज बोया था वह अब वट -वृक्ष बन चुका है जिसका पहला फल केजरीवाल हैं जिन्हें गुणानुरूप लोग स्वामी असत्यानन्द उर्फ़ खुजलीवाल  एलियाज़ केज़र बवाल  भी कहते हैं।इस वृक्ष की जड़  में कांग्रेस से छिटकी तृणमूल कांग्रेस की बेगम बड़ी आपा हैं जिन्होंने अपने सद्कर्मों से पश्चिमी बंगाल के भद्रलोक को उग्र लोक में तब्दील कर दिया है।अब लोग इसे ममताबाड़ी कहने लगे हैं।  इस वृक्ष की मालिन एंटोनिओ मायनो उर्फ़ पौनियां गांधी हैं। इसे जड़ मूल उखाड़ कर चीन में रूप देना चाहिए। वहां ये दिन दूना रात चौगुना पल्लवित होगा।   जब तक देस  में  एक भी कांग्रेसी है इस देश की अस्मिता अखंडता सम्प्रभुता को ख़तरा है।कांग्रेस की दैनिक ट्वीट्स हमारे मत की पुष्टि करने से कैसे इंकार करेंगी ?   
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COVID-19: Gap of six weeks ideal for vaccination after recovery

  VIJAYAWADA:  Medical professions say both Coronavirus infected patients as well as those who recovered from it observe at least four to six weeks of gap to take vaccines. They say the wait is essential as vaccine takes at least 15 days to help increase immunity levels in the body. They said in the wake of both categories of people rushing to vaccine centres to get jabs. Dr Ch. Manoj Kumar, chief of clinical service, Manipal Hospital, said that the Coronavirus- infected and the recovered persons should not at all avoid taking vaccination shots. However, waiting for a few weeks before getting the jab was advisable. Taking part in an awareness programme, Dr. Manoj Kumar answered various queries Covid-19 treatment, vaccines and other concerns among people. Excerpts: Q. Recently, RT-PCR tests are claimed to be inaccurate in their reports. What are the alternatives in such cases? What tests are available for Covid-19 A: RT-PCR test is the most recommended test as it helps detect Covid more

अपने -अपने आम्बेडकर

अपने -अपने आम्बेडकर          ---------वीरुभाई  आम्बेडकर हैं सब के अपने , अपने सब के रंग निराले , किसी का लाल किसी का नीला , किसी का भगवा किसी का पीला।  सबके अपने ढंग निराले।  नहीं राष्ट्र का एक आम्बेडकर , परचम सबके न्यारे , एक तिरंगा एक राष्ट्र है , आम्बेडकर हैं सबके न्यारे।  हथियाया 'सरदार ' किसी ने , गांधी सबके प्यारे।  'चाचा' को अब कोई न पूछे , वक्त के कितने मारे। 

फिलाल (कांग्रेस में दूसरे दिन भी सुलगी चिठ्ठी की चिंगारी ,२६ अगस्त २०२० अंक )का साफ संकेत है ,पार्टी चिरकुट और गैर -चिरकुटों में बटती बिखरती दिख रही है।झाड़ू की तीलियों को समेटना अब मुश्किल लग रहा है

फिलाल (कांग्रेस में दूसरे दिन भी सुलगी चिठ्ठी की चिंगारी ,२६ अगस्त २०२० अंक )का साफ संकेत है ,पार्टी चिरकुट और गैर -चिरकुटों में बटती बिखरती  दिख रही है।झाड़ू की तीलियों को समेटना अब मुश्किल लग रहा है।  जो पार्टी चार पांच आदमियों (सदस्यों )की कमिटी भी बनाने में ऊँघ रही है उसमें नेतृत्व कैसा और कहाँ है ?किसी को गोचर हो तो हमें भी खबर करे।  डर काहे का अब खोने को बचा क्या है ?माँ -बेटे चिरकालिक हैं बहना को घास नहीं। जीजा जी परिदृश्य से बाहर हैं।  जयराम रमेश ,शशि  थरूर साहब ,कपिल सिब्बल ,मनीष तिवारी ,मुकुलवासनिक साहब ,नबी गुलाम आज़ाद साहब चंद नाम हैं जिनका अपना वज़ूद है ,शख्सीयत भी।  इनमें फिलाल कोई चिरकुट भी नहीं है।  राहुल को तो इस देश का बच्चा भी गंभीरता से नहीं लेता। हंसना हंसाना बाहें चढ़ाना उनकी राष्ट्रीय स्तरीय मसखरी का अविभाज्य अंग है।  पार्टी का टाइटेनिक न डूबे बना रहे हम भी यही चाहते हैं। ये दिखाऊ  जंगी जहाज बन के न रह जाए। वीरुभाई (वीरेंद्र शर्मा ,पूर्व प्राचार्य ,चोधरी धीरपाल पोस्टग्रेजुएट कॉलिज ,बादली (झज्जर )-१२४ -१०५ , हरियाणा 

THE ARUNDHATI VIRUS :SARS -COV-3

बान  हारे की बान न जाए ,कुत्ता मूते टांग उठाय Habits die hard . अरुंधति जी आप अपनी आदत से मजबूर हैं। इसे कहते हैं ऑब्सेसिव कम्पलसिव डिसॉर्डर -जब तक आप  भारत के वर्तमान राजनीतिक प्रबंध के खिलाफ विष वमन नहीं कर लेती तब तक  आपके दिमाग में  चंद न्यूरोट्रांसमीटर्स का स्तर कमतर बना रहता है इसके यथोचित हो जाने पर आपकी बे-चैनी कम हो जाती है। तमाम किस्म की मनो -बीमारियों का आधार ये बायो -मॉलिक्यूल्स ही हैं जिन्हें न्यूरो -ट्रांसमिटर्स कहा जाता है इनका स्तर या तो सामन्य से कम हो जाता है या अधिक ऐसे में न्यूरॉन -रिसेप्टर्स सेल्स को या तो उत्तेजित करतीं हैं मनो -रोग में प्रयुक्त दवाएं या फिर इनका शमन करती हैं प्रशांत करतीं हैं इन अभिग्राहियों को। अरुंधति जी को इलाज़ की जरूरत है। सलाह मशविरा साइकोलॉजिकल कौन्सेलिंग का अपना असर होता है लेकिन असली काम दवाएं करतीं हैं एंटी -साइकोटिक /एंटी -न्यूरोलेप्टिक /एंटी -ऑब्सेसिव /एंटी -डिप्रेसिव आदिक  काम में ली जातीं हैं। अक्सर इन मनो -विकारों के लक्षण  ओवरलैप करते हैं परस्पर। बहर -सूरत हम अरुंधति बहन को बताना चाहेंगे -जो हमारे तब्लीगी जमाती भाई सार्स -क

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